रिपब्लिक भारत न्यूज़ 20-05-2026
हिमाचल प्रदेश की वर्तमान कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों, प्रशासनिक विफलता और आर्थिक दिवालिएपन के खिलाफ भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) ने अब सीधे तौर पर युद्ध का शंखनाद कर दिया है। औद्योगिक क्षेत्र बद्दी में पत्रकारों से विशेष बातचीत करते हुए भाजयुमो के प्रदेशाध्यक्ष श्री सन्नी शुक्ला जी ने सुक्खू सरकार पर तीखे राजनैतिक हमले किए और राज्य सरकार की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से दिशाहीन और तानाशाही करार दिया। इस दौरान उनके साथ भाजयुमो के प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी निशांत ठाकुर भी विशेष रूप से मौजूद रहे।

प्रदेशाध्यक्ष श्री सन्नी शुक्ला जी ने दोटूक शब्दों में कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली यह सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह विफल साबित हुई है। अपनी नाकामी और जनता के भारी आक्रोश को छिपाने के लिए अब यह सरकार पूरी तरह से दमनकारी और तुगलकी नीतियों पर उतर आई है, जिसे देवभूमि हिमाचल का स्वाभिमानी युवा, कर्मचारी और आम जनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर डकैती: सीधे कोर्ट जाने पर पाबंदी ‘तुगलकी’

भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष ने हाल ही में राज्य सरकार द्वारा कर्मचारियों के अधिकारों को कुचलने के लिए जारी किए गए नए प्रशासनिक आदेशों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया। श्री सन्नी शुक्ला जी ने कहा कि सुक्खू सरकार ने राज्य के लाखों कर्मचारियों के संवैधानिक और कानूनी अधिकारों पर सीधे तौर पर डकैती डालने का काम किया है। सरकार ने एक बेहद शर्मनाक और तानाशाही फरमान जारी किया है, जिसके तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी अपने राजनैतिक, दुर्भावनापूर्ण या मनमाने तबादले (Transfer) के खिलाफ सीधे माननीय उच्च न्यायालय (High Court) की शरण में जाता है, तो सरकार उसके खिलाफ दंडात्मक और अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी।
सन्नी शुक्ला जी ने कहा:
“भारत का पावन संविधान इस देश के हर नागरिक को, चाहे वह आम व्यक्ति हो या सरकारी कर्मचारी, अन्याय के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार देता है। लेकिन वर्तमान सुक्खू सरकार खुद को देश के कानून और न्यायपालिका से भी ऊपर समझने की भूल कर रही है। कर्मचारियों को डराने-धमकाने और उनके मौलिक अधिकारों का गला घोंटने के लिए यह दमनकारी नीति लाई गई है। भाजयुमो प्रदेश के लाखों कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। अगर इस काले और तानाशाही कानून को सरकार ने तुरंत वापस नहीं लिया, तो युवा मोर्चा राज्य सचिवालय का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेगा।”
कुनिहार बैलेट पेपर कांड: हार के डर से चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग
स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनावों का जिक्र करते हुए भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष ने कांग्रेस सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यह पूरा प्रदेश भली-भांति जानता है कि कांग्रेस सरकार राज्य में लोकतंत्र के सबसे जमीनी स्तंभ यानी स्थानीय निकायों के चुनाव करवाने से लगातार भाग रही थी। सुक्खू सरकार अपनी घटती लोकप्रियता और जनता के बीच उपजे भारी गुस्से से इस कदर डरी और सहमी हुई थी कि वह इन चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टालने की जुगत में लगी थी। आज अगर प्रदेश में नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव संपन्न हो पाए हैं, तो यह केवल और केवल माननीय हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और डंडे के कारण ही संभव हुआ है।
चुनावों के दौरान सामने आई बड़ी धांधली पर कड़ा प्रहार करते हुए श्री सन्नी शुक्ला जी ने कहा कि सोलन जिले के कुनिहार में चुनाव तैयारियों के दौरान दो बैलेट पेपर का अचानक गायब हो जाना कोई सामान्य प्रशासनिक लापरवाही नहीं है। यह सीधे तौर पर चुनावी प्रक्रिया की शुचिता, गोपनीयता और सुरक्षा में सेंध लगाने की एक सोची-समझी राजनैतिक साजिश का हिस्सा है। इस बेहद गंभीर मामले में असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) सहित 8 सरकारी कर्मचारियों पर FIR दर्ज होना यह साबित करता है कि वर्तमान सत्ता के भारी दबाव में आकर चुनावी मशीनरी का दुरुपयोग किया जा रहा है, ताकि पिछले दरवाजे से जनता के जनादेश को बदला जा सके। भाजयुमो इस पूरे कुनिहार बैलेट पेपर कांड की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग करता है, ताकि इस साजिश के पीछे बैठे असली सफेदपोश चेहरों को बेनकाब किया जा सके।
आर्थिक बदहाली का शिकार हिमाचल: फ्लॉप हुआ ‘सुक्खू मॉडल’
प्रदेश के गंभीर आर्थिक संकट (Financial Crisis) पर सरकार को घेरते हुए भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि आज हिमाचल प्रदेश पूरी तरह से वित्तीय दिवालिएपन की कगार पर खड़ा हो चुका है। सरकार चलाने और कर्मचारियों को समय पर वेतन-पेंशन देने के लिए भी मुख्यमंत्री के पास पैसे नहीं बचे हैं, और प्रदेश को रिकॉर्ड कर्ज के गहरे दलदल में धकेल दिया गया है। अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी साख बचाने के लिए मुख्यमंत्री, मंत्रियों और उच्च प्रशासनिक अधिकारियों की सैलरी में 20 से 50 प्रतिशत तक की कटौती का जो पाखंड और स्वांग रचा जा रहा है, उससे प्रदेश की प्रबुद्ध जनता गुमराह होने वाली नहीं है।
सन्नी शुक्ला जी ने कहा कि मंत्रियों की सैलरी का कुछ हिस्सा काटने का नाटक करके सरकार केवल सुर्खियां बटोरना चाहती है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि बजट की भारी कमी के कारण राज्य में तमाम विकास कार्य पूरी तरह से ठप (Stagnant) हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई एवं जनस्वास्थ्य विभाग (IPH) और अन्य महत्वपूर्ण विकासात्मक विभागों में ठेकेदारों के करोड़ों रुपये के भुगतान महीनों से लटके पड़े हैं। नई सड़कों का निर्माण, ग्रामीण पेयजल योजनाएं, और युवाओं के रोजगार से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट्स फंड की कमी के कारण दम तोड़ रहे हैं। सुक्खू सरकार केवल ‘कर्ज लेकर घी पीने’ की आत्मघाती नीति पर चल रही है, जिसका भयंकर खामियाजा हिमाचल प्रदेश की आने वाली पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा।
गवर्नेंस प्रोसेस में देश में फिसड्डी साबित हुआ हिमाचल
राष्ट्रीय स्तर पर आई हालिया प्रशासनिक रिपोर्टों का हवाला देते हुए श्री सन्नी शुक्ला जी ने कहा कि यह प्रत्येक हिमाचल वासी के लिए बेहद चिंताजनक और शर्मनाक है कि गवर्नेंस प्रोसेस (शासन और प्रशासनिक कार्यप्रणाली) के मामले में हिमाचल प्रदेश को राष्ट्रीय स्तर पर बेहद कम और निराशाजनक अंक मिले हैं। सुक्खू सरकार के राज में सचिवालय से लेकर जिला और उपमंडल स्तर के दफ्तरों तक में प्रशासनिक सुस्ती और अराजकता का बोलबाला है। डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, आधार सीडिंग, जनकल्याणकारी योजनाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग और पारदर्शी कार्यप्रणाली के मोर्चे पर हिमाचल प्रदेश देश के अन्य प्रगतिशील राज्यों की तुलना में कोसों पीछे छूट गया है।
उन्होंने कहा कि जब प्रदेश का शासन ही पूरी तरह से दिशाहीन, पंगु और सुस्त हो जाए, तो आम जनता की समस्याओं का समय पर निवारण कैसे संभव है? आज प्रदेश के युवाओं को रोजगार के लिए, सड़कों की बदहाली और बुनियादी सुविधाओं की मरम्मत के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। मुख्यमंत्री केवल ‘व्यवस्था परिवर्तन’ का खोखला और झूठा नारा देते घूम रहे हैं, जबकि असलियत में उन्होंने हिमाचल प्रदेश की पूर्ववर्ती भाजपा सरकार द्वारा बनाई गई सुदृढ़ और पारदर्शी प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से तहस-नहस करके रख दिया है।
भाजयुमो के प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन का ऐलान
भाजयुमो प्रदेशाध्यक्ष श्री सन्नी शुक्ला जी ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए ऐलान किया कि भारतीय जनता युवा मोर्चा प्रदेश की इस जनविरोधी, युवा विरोधी और कर्मचारी विरोधी कांग्रेस सरकार को अब चैन की नींद नहीं सोने देगा। आने वाले दिनों में भाजयुमो इन सभी ज्वलंत मुद्दों को लेकर बद्दी-नालागढ़ सहित प्रदेश के प्रत्येक मंडल, जिला मुख्यालयों और अंततः राज्य स्तर पर एक उग्र, व्यापक और निर्णायक आंदोलन की शुरुआत करेगा। युवा मोर्चा के कार्यकर्ता हर गांव, हर बूथ और हर घर तक जाकर सुक्खू सरकार के इस ‘कुशासन’ की पोल खोलेंगे और जब तक इस तानाशाही सरकार को सत्ता से उखाड़ नहीं फेंकते, हमारा संघर्ष लगातार जारी रहेगा।
