प्रदेश सरकार ने 235 टीजीटी और प्रमोटी प्रवक्ताओं को बनाया मुख्य अध्यापक 

रिपब्लिक भारत न्यूज़ 10-12-2025

हिमाचल प्रदेश सरकार ने 235 टीजीटी और प्रमोटी प्रवक्ताओं को पदोन्नत कर हेडमास्टर बना दिया है। इस संबंध में बुधवार को स्कूल शिक्षा निदेशालय ने अधिसूचना जारी की। पदोन्नत हेडमास्टरों को नए स्कूलों में नियुक्ति दी गई है। विभागीय पदोन्नति समिति की सिफारिश पर 26 अप्रैल 2010 से पहले बिना किसी ऑप्शन के प्रमोट हुए टीजीटी और प्रमोटी प्रवक्ताओं को हेडमास्टर बनाया गया है। इन्होंने हेडमास्टर के पद पर प्रमोशन का विकल्प चुना था। विशेष कारण पर ही पदोन्नति छोड़ने की अनुमति दी जाएगी। ऐसे मामलों में आगामी एक साल तक पदोन्नति पर रोक रहेगी। सेवा विवरण की भी दोबारा जांच होगी। चूक पर राहत नहीं मिलेगी।

स्कूल शिक्षा निदेशालय ने नए पदोन्नत हेडमास्टरों को निर्देश दिया है कि वे अपनी नई पोस्टिंग की जगह पर ड्यूटी ज्वाइन करें। साथ ही वित्त विभाग की 24 मई 2023 के अधिसूचना में बताए गए समय के अंदर सही तरीके से विभाग को अपनी ज्वाइनिंग रिपोर्ट जमा करें। आदेश जारी होने की तारीख से एक दिन में 30 किलोमीटर या उससे कम और पांच दिन में 30 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी वाले स्थान पर ज्वाइनिंग देनी होगी। किसी भी हालत में ज्वाइनिंग के लिए कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। पदोन्नति वापस लेने के बारे में कोई खास आदेश अलग से जारी नहीं किए जाएंगे।

संबंधित स्कूल प्रमुखों को निर्देश दिया है कि वे नए पदोन्नत हेडमास्टरों को तुरंत रिलीव करें। शिक्षा निदेशालय ने सभी उपनिदेशकों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी पदोन्नत शिक्षक को राहत देने से पहले उसकी सेवा से जुड़ी सभी जानकारियों का पुख्ता सत्यापन किया जाए। किसी भी तरह की गलती सामने आने पर तुरंत निदेशालय से स्पष्टीकरण मांगकर ही आगे कार्रवाई हो। हर पदोन्नत हेडमास्टर का नाम, वरिष्ठता नंबर और आरक्षण श्रेणी की दोबारा जांच की जाए।

 सुनिश्चित किया जाए कि पदोन्नत हेड मास्टर एक्स-सर्विसमैन कोटे में भर्ती न हुआ हो और न ही उसने पहले प्रवक्ता/पीजीटी पद के लिए विकल्प दिया हो। कोई भी हेडमास्टर जो 26 अप्रैल 2010 के बाद प्रवक्ता/पीजीटी बना है, उसे रिलीव न किया जाए। इसी तरह टीजीटी से कोर्ट आदेशों के तहत 1 सितंबर 2010 के बाद विकल्प शर्त सहित बने प्रवक्ताओं को भी राहत नहीं दी जाएगी। अधिकारियों के खिलाफ विभागीय या सतर्कता जांच लंबित न हो, यह भी अनिवार्य शर्त रखी गई है। शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि जनहित में कोई भी पदोन्नति छोड़ने का अधिकार नहीं रखता। यदि कोई पदोन्नति छोड़ने की अर्जी देता है तो कारण सही पाए जाने पर ही उसे अनुमति मिलेगी।

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