प्रदेश सरकार विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कर्मचारियों के साथ कर रही सौतेला व्यवहार, पदोन्नति/कैरियर उन्नति के अधिकार से रखा जा रहा वंचित
रिपब्लिक भारत न्यूज़ 13-04-2026
सभी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संयुक्त कार्यवाही समिति (JAC) विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों का एक संयुक्त मंच है, जो एक समान उद्देश्य हेतु एकजुट हुआ है।

University Grants Commission (UGC) ने अपनी वेतन पुनरीक्षण समिति (PRC) की सिफारिशों के आधार पर अपने आदेश संख्या 23-4/2017 दिनांक 30 जनवरी, 2018 के माध्यम से 7वें केंद्रीय वेतनमान लागू किए, जिन्हें तत्पश्चात Ministry of Human Resource Development (मानव संसाधन विकास मंत्रालय), उच्च शिक्षा विभाग, भारत सरकार, नई दिल्ली द्वारा अधिसूचित किया गया।
यह प्रस्तुत किया जाता है कि UGC के 7वें वेतनमान लागू होने के बाद भारत के विभिन्न राज्यों के सभी विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक अपने वेतन एवं अन्य देयकों को UGC 7वें वेतनमान के अनुसार प्राप्त कर रहे हैं तथा Career Advancement Scheme (CAS) के अंतर्गत पदोन्नतियां भी प्राप्त कर रहे हैं।
परंतु हिमाचल प्रदेश सरकार ने भी UGC 7वें वेतनमान को अधिसूचना संख्या EDN-A-Kha (15)-3/2021 दिनांक 01.05.2022 तथा Agr. B-B (8)-3/2022 दिनांक 01.10.2022 के माध्यम से लागू किया है, किंतु उक्त अधिसूचना की धारा संख्या 5 (HPU) एवं 4 (CSKHPKV एवं डॉ. वाई.एस. परमार विश्वविद्यालय) में यह शर्त रखी गई है कि Career Advancement Scheme तथा उच्च योग्यता प्राप्त करने पर प्रोत्साहन वेतन वृद्धि राज्य सरकार द्वारा पृथक आदेश जारी होने पर ही प्रदान की जाएगी। यह उल्लेखनीय है कि उक्त अधिसूचना की धारा संख्या 5 तथा CAS के क्रियान्वयन हेतु पृथक अधिसूचना जारी न होने के कारण, वर्ष 2022 से हिमाचल प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में कोई भी पदोन्नति नहीं हो पाई है। यह भी उल्लेखनीय है कि हमारे अनेक संकाय सदस्य आगामी दो वर्षों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, किंतु CAS लागू न होने के कारण उन्हें अब तक उनकी वैध पदोन्नति प्राप्त नहीं हो सकी है। इसके अतिरिक्त, यह भी जानना आवश्यक है कि हिमाचल प्रदेश के अन्य विभागों में कर्मचारियों की नियमित पदोन्नतियां की जा रही हैं तथा उन्हें उनके बकाया लाभ भी प्रदान किए जा रहे हैं। केवल विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में ही कर्मचारियों के साथ यह अन्याय किया जा रहा है, जहां उन्हें उनके पदोन्नति/कैरियर उन्नति के अधिकार से वंचित रखा गया है। शिक्षकों के हितों की सुरक्षा एवं उनके मनोबल को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। प्रदेश सरकार जान बूझ कर उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है । प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों की हालत दिन प्रतिदिन खराब हो रही है , जिसका प्रभाव शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है । पिछले तीन वर्षों से उच्च शिक्षण संस्थानों का शिक्षक अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहा है ।
इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से हम सरकार को चेतावनी देना चाहते हैं कि सरकार का यह असंवेदनशील रवैया एक बड़े आंदोलन को न्योता दे रहा है । यह सरकार कर्मचारी विरोधी साबित हो रही है चाहे डी ए की बात हो या सातवें वेतन आयोग का एरियर प्रदेश सरकार सरकारी कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है । CAS के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर पदौन्नति के बाद एसोसिएट प्रोफेसर बनता है तथा एसोसिएट प्रोफेसर , प्रोफेसर बनता है ,यह एक सामान्य प्रक्रिया है जो की देश के हर विश्विद्यालय में नियमित रूप से अपनायी जाती है लेकिन हिमाचल प्रदेश देश का इकलौता राज्य है जहाँ इस पर रोक लगायी गई है । National Education Policy 2020 (NEP 2020) में भी यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि “शिक्षा की प्रभावशीलता और गुणवत्ता केवल बेहतर एवं संतुष्ट शिक्षकों के माध्यम से ही सुनिश्चित की जा सकती है।” अतः संयुक्त कार्यवाही समिति (JAC) चेतावनी स्वरूप इस पत्रकार वार्ता के माध्यम से प्रदेश सरकार को बताना चाहता है कि राज्य में 7वें UGC वेतनमान के अंतर्गत Career Advancement Scheme (CAS) को बिना किसी विलंब के लागू करने हेतु संबंधित प्राधिकरणों को निर्देशित करने करें। हमें आशा है कि सरकार शिक्षकों की भावनाओं का सम्मान करते हुए शीघ्र ही पृथक अधिसूचना जारी कर CAS तथा उच्च योग्यता प्राप्त करने पर प्रोत्साहन वेतन वृद्धि को लागू करेगी।
