“घराट बचाओ, विरासत बचाओ” अभियान शुरू करने की घोषणा: धीरज रमौल

रिपब्लिक भारत न्यूज़ 27-02-2026

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में पारंपरिक जलचालित आटा चक्कियां, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘घराट’ कहा जाता है, आज विलुप्ति की कगार पर पहुंच चुकी हैं। प्रयास सोसाइटी ने इस विषय पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए “घराट बचाओ, विरासत बचाओ” अभियान प्रारंभ करने की घोषणा की है।

प्रयास सोसाइटी के सचिव धीरज रमौल ने जारी बयान में कहा कि घराट केवल अनाज पिसने की पारंपरिक व्यवस्था नहीं, बल्कि पहाड़ी समाज की सांस्कृतिक पहचान, पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण आत्मनिर्भरता का प्रतीक हैं। पूर्व समय में प्रत्येक नदी-नाले के आसपास स्थापित ये घराट स्थानीय लोगों की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करते थे। इनमें मक्की, गेहूं, जौ, मंडुवा सहित विभिन्न अनाज पिसे जाते थे।

उन्होंने बताया कि घराट में धीमी गति से पिसाई होने के कारण आटे की गुणवत्ता बेहतर होती है तथा पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। इसके अतिरिक्त यह प्रणाली पूर्णतः पर्यावरण अनुकूल है क्योंकि यह जल-ऊर्जा पर आधारित है और किसी प्रकार का प्रदूषण नहीं फैलाती।

धीरज रमौल ने कहा कि आधुनिक मशीनों के बढ़ते प्रचलन, रखरखाव की कमी, जलस्रोतों के क्षरण और जागरूकता के अभाव के कारण सैकड़ों घराट बंद हो चुके हैं। यदि समय रहते संरक्षण के ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियां इस परंपरा को केवल इतिहास के पन्नों में ही देख पाएंगी।

प्रयास सोसाइटी ने सरकार, पंचायत प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं युवाओं से सामूहिक सहयोग की अपील करते हुए निम्न सुझाव प्रस्तुत किए हैं—

बंद पड़े घराटों की पहचान कर उनके पुनरुद्धार हेतु विशेष योजना बनाई जाए।

पारंपरिक तकनीक के संरक्षण के लिए प्रशिक्षण एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाए जाएं।

घराट में पिसे आटे को विशेष ब्रांडिंग के साथ बाजार उपलब्ध कराया जाए।

घराटों को ग्रामीण पर्यटन एवं इको-टूरिज्म से जोड़ा जाए।

विद्यालयों एवं पंचायत स्तर पर जन-जागरूकता अभियान चलाया जाए।

प्रयास सोसाइटी शीघ्र ही क्षेत्रीय स्तर पर जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी और इस दिशा में जनभागीदारी सुनिश्चित करने के लिए व्यापक संवाद अभियान चलाएगी।

संस्था का मानना है कि घराटों का संरक्षण न केवल सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करेगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय रोजगार सृजन और स्वस्थ जीवनशैली को भी बढ़ावा देगा।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *