रिपब्लिक भारत न्यूज़ 02-03-2026
हिमाचल प्रदेश में ‘व्यवस्था परिवर्तन’ के दावों के बीच राजस्व विभाग से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। सोलन जिले के चार ऐसे कानूनगो अधिकारियों को नायब तहसीलदार के पद पर पदोन्नत किया गया है, जो लगभग 9 माह पूर्व सेवा निवृत्त हो चुके थे। यह निर्णय प्रशासनिक कार्यप्रणाली, सेवा नियमों तथा पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
25 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचना के अनुसार सेवानिवृत्त अधिकारियों को पदोन्नति प्रदान की गई है तथा उनकी पोस्टिंग के आदेश अलग से जारी किए जाने की बात कही गई है। प्रश्न यह उठता है कि जो अधिकारी विभाग का हिस्सा ही नहीं हैं, उनकी पोस्टिंग किस आधार पर और किस उद्देश्य से की जाएगी? यदि विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की संस्तुति पहले हो चुकी थी, तो आदेश 9 माह तक लंबित क्यों रखा गया?
इस निर्णय के संभावित वित्तीय प्रभाव भी गंभीर चिंता का विषय हैं। पदोन्नति के साथ उच्च वेतनमान का लाभ मिलने से संबंधित अधिकारियों की अंतिम आहरित वेतन में वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभों पर पड़ेगा। ऐसे समय में जब प्रदेश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है, इस प्रकार के निर्णय जनता के समक्ष कई सवाल खड़े करते हैं।
चरणजीत चौधरी, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य, भारतीय जनता युवा मोर्चा हिमाचल प्रदेश एवं संयम गुप्ता, अध्यक्ष, भारतीय जनता युवा मोर्चा मंडल पांवटा साहिब ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि प्रदेश का युवा वर्ग वर्षों तक कड़ी मेहनत कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है और सरकारी सेवाओं में अवसर की प्रतीक्षा करता है। ऐसे में सेवानिवृत्त अधिकारियों को पदोन्नति देना युवाओं के अधिकारों की अनदेखी है और उनके मनोबल को आहत करने वाला निर्णय है।
उन्होंने कहा कि यदि प्रशासनिक प्रक्रिया में विलंब हुआ है तो उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर योग्य एवं पात्र युवाओं से भरा जाना चाहिए। सरकार को इस पूरे प्रकरण पर सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए तथा यह भी बताना चाहिए कि इस निर्णय से प्रदेश के खजाने पर कितना अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
भाजयुमो ने स्पष्ट किया कि युवा वर्ग के हितों की अनदेखी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्ष अवसर सुनिश्चित करना सरकार का दायित्व है।
