एस एफ आई ने शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों से हो रही PTA फीस की लूट और उसके  दुरुपयोग से संबंधित ज्ञापन अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक को सौंपा

रिपब्लिक भारत न्यूज़ 16-06-2026

एस एफ आई शिमला जिला कमेटी के एक प्रतिनिधि मंडल ने आज दिनांक 16/06/2026 को  “अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक”  को शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों से हो रही PTA फीस की लूट और उसका दुरुपयोग से संबंधित ज्ञापन सौंपा।

स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), एक वैज्ञानिक, प्रगतिशील, लोकतांत्रिक एवं धर्मनिरपेक्ष छात्र संगठन होने के नाते, समय-समय पर हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों तथा छात्र समुदाय से जुड़े विभिन्न मुद्दों और चिंताओं को उठाता रहा है।

आज एस एफ आई शिमला जिला कमेटी के प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन के माध्यम से अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक का ध्यान शैक्षणिक संस्थानों में PTA फीस के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार पर केंद्रित किया। पेरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन (पीटीए) निधि की व्यवस्था, जिसके अंतर्गत छात्रों से धनराशि एकत्रित कर शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियों एवं पहलों को नियमित बजट से अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है, राज्य के विभिन्न संस्थानों में स्पष्ट रूप से दुरुपयोग का शिकार हो रही है। इस दुरुपयोग का सबसे हालिया उदाहरण राजकीय उत्कृष्टता महाविद्यालय, संजौली से सामने आया है, जहाँ शैक्षणिक सत्र 2022-23 के दौरान पीटीए निधि के नाम पर 19 लाख रुपये से अधिक की राशि एकत्रित की गई और उसे संदिग्ध रूप से भवनों के नवीनीकरण, मरम्मत तथा संस्थान के लिए एक संगीतमय एंथम (गीत) तैयार करने पर व्यय किया गया। इसी प्रकार का एक मामला शैक्षणिक सत्र 2021-22 में राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा में भी सामने आया था। जहां पर 21 लाख से ज्यादा रूपया छात्रों से PTA फीस के नाम पर इकट्ठा किया गया और आरटीआई लगाने पर प्रशासन के पास उसका कोई स्पष्ट और औपचारिक विवरण नहीं था। जिससे यह स्पष्ट होता है कि पूरे हिमाचल प्रदेश के तमाम शैक्षणिक संस्थानों में PTA के नाम पर छात्रों से फीस वसूली जा रही है लेकिन इसका सदुपयोग किसी भी शैक्षणिक संस्थान में नहीं हो रहा है।

यह उल्लेखनीय है कि अनुदान सहायता टू पेरेंट्स-टीचर्स एसोसिएशन नियम, 2006 में केवल पीटीए की पात्रता, अनुदान की मात्रा तथा शिक्षकों की नियुक्ति हेतु अनुदान जारी करने संबंधी प्रावधान निर्धारित किए गए हैं, ताकि संस्थानों का दैनिक संचालन सुचारु रूप से हो सके। इन नियमों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पीटीए निधि का उपयोग शिक्षकों की नियुक्ति के अतिरिक्त अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है या नहीं। पीटीए निधि के उचित उपयोग संबंधी स्पष्ट प्रावधानों एवं दिशा-निर्देशों के अभाव में इसके दुरुपयोग एवं अनियमितताओं की संभावना अत्यधिक बढ़ जाती है।

एस एफ आई के प्रतिनिधि मंडल ने ज्ञापन के माध्यम से अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक के समक्ष निम्नलिखित मांगे प्रस्तुत की:-
1) पीटीए निधि के उचित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएँ, ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग अथवा धन के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाई जा सके।
2) उपरोक्त में दिए गए पीटीए फंड के नाम पर होने वाले भ्रष्टाचार से संबंधित एक जांच कमेटी गठित की जाए ताकि पारदर्शिता स्थापित हो पाए।
3) समूचे हिमाचल प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में पीटीए फंड की एक न्यूनतम व अधिकतम सीमा निर्धारित की जाए।
4) पीटीए फंड का इस्तेमाल किन चीजों में होगा, इसको लेकर स्पष्ट नियम परिभाषित किए जाए।
5) पीटीए फंड से संबंधित 2025 के प्रावधानों को सख्ती से लागू किया जाए।

एस एफ आई शिमला जिला सचिव पवन कुमार ने कहा कि ज्ञापन से संबंधित तमाम मांगों को लेकर अतिरिक्त उच्च शिक्षा निदेशक ने हमें यह आश्वासन दिया है कि तमाम मांगों पर संज्ञान लिया जाएगा। यदि इन मांगों पर प्रशासन सख्ती नहीं दिखाता है तो जुलाई के पहले सप्ताह से हिमाचल प्रदेश के सभी शैक्षणिक संस्थानों में एसएफआई इसके खिलाफ राज्यव्यापी प्रदर्शन शुरू करेगी। जिसका जिम्मेदार प्रशासन व सरकार स्वयं होगी।

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