रिपब्लिक भारत न्यूज़ 18-07-2026
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) की हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) इकाई ने आज विश्वविद्यालय परिसर में केंद्र सरकार की शिक्षा नीतियों और छात्रों के मुद्दों की अनदेखी के विरोध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन किया।
प्रदर्शन के दौरान एसएफआई कार्यकर्ताओं ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है। संगठन का आरोप है कि नीट (NEET) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं ने लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। इसके बावजूद केंद्र सरकार जवाबदेही तय करने के बजाय छात्रों और जनआंदोलनों की आवाज़ को दबाने का प्रयास कर रही है।
एसएफआई ने कहा कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की जारी भूख हड़ताल के 21वें दिन प्रशासन द्वारा आंदोलन को दबाने और बाधित करने की कार्रवाई लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है। संगठन ने कहा कि जनहित के मुद्दों को उठाने वालों की आवाज़ को कुचलने की बजाय सरकार को उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
इस अवसर पर एसएफआई एचपीयू परिसर सचिव मुकेश ने कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि धर्मेंद्र प्रधान तत्काल अपने पद से इस्तीफा दें तथा शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
मुकेश ने कहा कि छात्र-युवा अपने अधिकारों और बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एसएफआई हर उस आवाज़ के साथ खड़ी है जो लोकतांत्रिक अधिकारों, शिक्षा और छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए संघर्ष कर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार छात्रों के मुद्दों और जनआंदोलनों की अनदेखी करती रही तो एसएफआई अपने आंदोलन को और व्यापक करेगी।
प्रदर्शन के अंत में एसएफआई ने केंद्र सरकार से मांग की कि शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त अनियमितताओं पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए, लोकतांत्रिक आंदोलनों का सम्मान किया जाए तथा छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएं.
