रिपब्लिक भारत न्यूज़ 17-06-2026
हिमाचल पथ परिवहन निगम के चालक-परिचालकों ने अपनी जायज वित्तीय मांगों और लंबित भुगतानों को लेकर सरकार के खिलाफ चौतरफा मोर्चा खोल दिया है। इसी कड़ी में आज नाहन के अंतरराष्ट्रीय बस स्टैंड पर कर्मचारियों ने एकजुट होकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया और गेट मीटिंग के जरिए अपनी आवाज बुलंद की। कर्मचारियों ने प्रदेश सरकार और निगम प्रशासन के ढुलमुल रवैये के खिलाफ जमकर रोष जताया और साफ किया कि अब खोखले आश्वासनों से काम नहीं चलेगा, रुकी हुई देनदारियां तुरंत खाते में डालनी होंगी।

कर्मचारी नेताओं ने तथ्यों के साथ मैनेजमेंट को घेरते हुए कहा कि दिन-रात ड्यूटी बजाने वाले परिवहन कर्मियों को समय पर सैलरी तक नहीं मिल पा रही है। एचआरटीसी राज्य कार्यकारिणी के पदाधिकारी धर्मेंद्र शर्मा ने मंच से एलान किया कि कर्मचारियों के इलाज के दावों (मेडिकल रीइम्बर्समेंट) का करीब 20 करोड़ रुपया अटका पड़ा है। यही नहीं, 50 हजार रुपये के एरियर की एकमुश्त किस्त पर भी कुंडली मारकर बैठा प्रशासन सुध नहीं ले रहा है, जबकि सूबे के दूसरे तमाम महकमों को यह लाभ वर्षों पहले ही दिया जा चुका है।
यूनियन के पदाधिकारियों ने सबसे बड़ा मुद्दा चालकों और परिचालकों के रात्रिकालीन भत्ते का उठाया, जो बढ़ते-बढ़ते अब करीब 150 करोड़ रुपये के भारी-भरकम आंकड़े पर पहुंच चुका है। कर्मचारियों ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि 25 जून की समयसीमा तक उनकी इन मांगों का स्थाई समाधान नहीं निकाला गया, तो पूरे प्रदेश में एचआरटीसी बसों का अनिश्चितकालीन चक्का जाम कर दिया जाएगा। बात यहीं खत्म नहीं होती, यूनियन ने यह भी दोटूक कह दिया है कि यदि भविष्य में हर महीने की 1 तारीख को वेतन जारी नहीं हुआ, तो ठीक अगले दिन यानी 2 तारीख से समूचा स्टाफ ‘नो वर्क, नो ड्यूटी’ के तहत काम छोड़ो आंदोलन शुरू कर देगा।
नेताओं के मुताबिक, बीते 10 जून से पूरे हिमाचल में एक सघन जनजागरण मुहिम चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत हर डिपो पर गेट मीटिंग कर रणनीति बनाई जा रही है। यह चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन आगामी 25 जून तक इसी तरह जारी रहेगा, और यदि फिर भी सरकार की नींद नहीं खुली, तो इस आंदोलन को एक बड़े प्रदेशव्यापी चक्का जाम में तब्दील कर दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
